Thursday 20th of August 2026

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मानवता की पहली धरती अयोध्या : स्वामी रामदिनेशाचार्य : सृष्टि की प्रथम भूमि अयोध्या : डॉ. बिजेंद्र सिंह अवध विश्वविद्यालय में संत सम्मेलन का हुआ आयोजन

मानवता की पहली धरती अयोध्या : स्वामी रामदिनेशाचार्य

सृष्टि की प्रथम भूमि अयोध्या : डॉ. बिजेंद्र सिंह

अवध विश्वविद्यालय में संत सम्मेलन का हुआ आयोजन

अयोध्या। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के स्वामी विवेकानंद प्रेक्षागृह में सेवा पखवाड़ा के तहत कुलाधिपति एवं राज्यपाल उत्तर प्रदेश की प्रेरणा से संत सम्मेलन का आयोजन कुलपति कर्नल डॉ बिजेंद्र सिंह की अध्यक्षता में किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जगदगुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य रहे।

अपने उद् बोधन में जगदगुरु ने कहा कि मानवता की पहली धरती अयोध्या है। अयोध्या का नाम लेने मात्र से संपूर्ण विश्व की मानवता का ज्ञान हो जाता है। अयोध्या मानव से देवत्व प्राप्त करने की धरती है। गुरु को ब्रह्मा विष्णु महेश की तीनों कहा गया है क्योंकि ब्रह्मा के रूप में गुरु छात्र का सृजन करता है। विष्णु के रूप में पालन करता है, और महेश के रूप में बुराइयों का संहार करता है। 33 कोटि देवताओं में राम सर्वोपरि क्यों हैं। मानवता में परमात्मा का बोध कराने के लिए राम अवतरित हुए जिसने सत्ता, सिंहासन का परित्याग कर दिया वह राम हैं। जगदगुरु ने कहा कि इस सृष्टि में गुरु शिष्य को अपने पैर पर खड़ा करने का कार्य करता है। जीवन की प्रथम सीख गुरु ही देता है। छात्रों को सजग करते हुए स्वामी जी ने कहा कि अर्थ के अभाव में व्यक्ति शिक्षा छोड़ देता है, लेकिन नशा नहीं छोड़ता जिसने चलना एवं तपना सीखा वहीं मर्यादा पुरुषोत्तम राम बना। जिसने सुख सुविधा का परित्याग कर संघर्ष नहीं किया वह सफल नहीं हो सकता। अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति कर्नल डॉ. बिजेंद्र सिंह ने कहा कि सृष्टि की प्रथम भूमि अयोध्या है। जीवन जीने की परिकल्पना राम है। विश्व के प्रणेता राम हैं। श्रीराम ने समूची मानवता को एक सूत्र में पिरोने का कार्य किया है। जीवन में आदर्श के युग शिखर राम है। कुलपति ने कहा कि जीवन में सफल होने के लिए समय प्रबंधन आवश्यक है क्योंकि स्वयं को अपग्रेड करने का समय मिल जाता है और जीवनचर्या लंबी हो जाती है। कार्यक्रम का संचालन अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. नीलम पाठक ने किया। इस अवसर पर महामंडलेश्वर आशुतोष दास, प्रो. सी के मिश्र, प्रो. जी आर मिश्र, प्रो. अनूप कुमार, डॉ. राजेश कुमार सिंह, डॉ. अवध नरायन, आशीष मिश्र शाहिद बड़ी संख्या में शिक्षक छात्र उपस्थित रहे।

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