गुरु और शिष्य की परंपरा आज भी संतो की उदासीन परंपरा में संरक्षित : बाबा संगत बक्स उदासीन ऋषि आश्रम रानोपाली में गुरु पर्व महोत्सव सादगी के साथ शुरु
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Mon, Sep 8, 2025
गुरु और शिष्य की परंपरा आज भी संतो की उदासीन परंपरा में संरक्षित
बाबा संगत बक्स उदासीन ऋषि आश्रम रानोपाली में गुरु पर्व महोत्सव सादगी के साथ शुरु
16 को गुरु पर्व का मुख्य उत्सव, धर्म ध्वजा का होगा विशेष पूजन व आश्रम में समाधिस्थ महापुरुषों को दी जायेगी श्रद्धांजलि
श्रीमद्भागवत कथा एक अमर कथा है,सुनने मात्र से ही कट जाते हैं सारे पाप:डा भरत दास
अयोध्या। गुरु और शिष्य की परंपरा आज भी संतो की उदासीन परंपरा में संरक्षित है। वैसे तो पूरी राम नगरी अयोध्या में गुरु शिष्य की परंपरा अपने रस की सुगंध से महकती रहती है लेकिन त्याग तपस्या की प्रमुख सिद्ध पीठ बाबा संगत बक्स उदासीन ऋषि आश्रम रानोपाली में प्रत्येक वर्ष पितृपक्ष के अवसर पर अपने गुरु स्मृति में समारोह से गुंजायमान होती रहती है। प्रत्येक वर्ष हजारों की संख्या में अपने गुरुओं को नमन करने इस परंपरा से जुड़े हजारों शिष्य देश के कोने-कोने से आश्रम में पहुंचते थे और नमन करते थे। उदासीन ऋषि आश्रम के युवा महंत डॉ भरत दास जी महाराज ने बताया गुरु पर्व मनाया जा रहा है जिसमें 8 सितंबर यानि आज से ही श्रीमद् भागवत महापुराण का पाठ प्रारंभ कर दिया गया जिसका पारायण 14 सितंबर को होगा। उन्होंने बताया कि 300 वर्ष पहले भजनानंदी सिद्ध संत संगत बक्स बाबा ने इस आश्रम की स्थापना की थी और देश के कोने कोने में उनके शिष्य थे और वह सभी लोग गुरु पर्व के अवसर पर आश्रम में आकर के गुरु भगवान को नमन करते थे। संगत बाबा के साथ आश्रम से जुड़े सभी यशस्वी संतो को याद किया जाएगा।
15 सितंबर को राम चरित मानस पाठ शुरु होगा जिसका समापन 16 को होगा। इसके साथ ही धर्म ध्वाजा का विशेष पूजन व आश्रम में समाधिस्थ महापुरुषों को श्रद्धांजलि दी जायेगी। गुरु पर्व का समापन 18 सितंबर को आयाराम अखाड़े में भंडारे के साथ होगा।
कथा का शुभारंभ करते हुए उदासीन ऋषि आश्रम के युवा महंत डॉ भरत दास जी महाराज ने कहा कि जन्मांतरे यदा पुण्यं तदा भागवतं लभेत! अर्थात जन्म-जन्मांतर एवं युग-युगांतर में जब पुण्य का उदय होता है तब जीवमात्र को ऐसे सुअवसर प्राप्त होते है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा सुनने मात्र से ही कट जाते हैं सारे पाप। डा भरत दास जी ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा एक अमर कथा है। इसे सुनने से पापी से पापी व्यक्ति भी पाप से मुक्त हो जाता है। महाराज श्री ने प्रथम दिवस पर श्रीमद्भागवत कथा का महात्म्य बताते हुए कहा कि वेदों का सार युगों-युगों से मानव जाति तक पहुंचता रहा है। भागवत महापुराण यह उसी सनातन ज्ञान की पयस्विनी है जो वेदों से प्रवाहित होती चली आ रही है। इसीलिए भागवत महापुराण को वेदों का सार कहा गया है। महोत्सव में मुख्य अतिथि के रुप में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी भी होगें शामिल, पावन सानिध्य परम तपस्वी श्रीमहंत बाबा कल्याण दास जी महाराज का है तो अध्यक्षता श्रीमहंत डा भरत दास महाराज कर रहें है।आज से श्रीमद् भागवत कथा की अमृत वर्षा व्यासपीठ से स्वामी शिवचंद्र दास महाराज कर रहें है। कथा के शुभारंभ में श्रीमद् भागवत महापुराण की व्याख्या करते हुए व्यासपीठ से स्वामी शिवचंद्र दास महाराज ने बताया कि श्रीमद् भागवत अर्थात जो श्री से युक्त है, श्री अर्थात चैतन्य, सौंदर्य, ऐश्वर्या, भागवत: प्रोक्तम् इति भागवत भाव कि वो वाणी, जो कथा जो हमारे जड़वत जीवन में चैतन्यता का संचार करती है। जो हमारे जीवन को सुंदर बनाती है वो श्रीमद्भागवत कथा जो सिर्फ मृत्युलोक में ही संभव है। और साथ ही यह एक ऐसी अमृत कथा है जो देवताओं के लिए भी दुर्लभ है इसलिए परीक्षित ने स्वर्ग अमृत के बजाए कथामृत का वरण किया किस स्वर्गामृत का पान करने से पुन्यों का क्षय होता है पापों का नहीं। कितु कथा अमृत का पान करने से संपूर्ण पापों का नाश होता है। इस मौके पर विहिप के दिनेश सिंह, गुलशन बाबा, प्राचार्य महंत रामभद्र दास,अभिषेक दास आदि लोग मौजूद रहें।
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