आध्यात्मिक अनुष्ठानों की सुगंध, भक्तिरस और संस्कृति की इंद्रधनुषीय छटा : भक्तमाल कथा के श्रवण और मनन से शुष्क हृदय भी सरस हो जाता है तथा भक्ति की लहरें निरंतर आंदोलित रहती है: डा राघवाचार्य
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Sun, Oct 26, 2025
आध्यात्मिक अनुष्ठानों की सुगंध, भक्तिरस और संस्कृति की इंद्रधनुषीय छटा से सराबोर हो रहा बड़ा भक्तमाल आश्रम
विंदुगद्यायाचार्य स्वामी देवेन्द्रप्रसादाचार्य, श्रीमहंत कौशल किशोर दास व रसिक पीठाधीश्वर श्रीमहंत जन्मेजय शरण ने दिव्य भक्तमाल कथा का किया उद्घाटन
व्यासपीठ से कथा की अमृत वर्षा कर रहें जगद्गुरु रामानुजाचार्य डा राघवाचार्य महाराज, महंत डा अवधेश कुमार दास कर रहें महोत्सव का संयोजन
भक्तमाल कथा के श्रवण और मनन से शुष्क हृदय भी सरस हो जाता है तथा भक्ति की लहरें निरंतर आंदोलित रहती है: डा राघवाचार्य
अयोध्या। प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या इन दिनों भक्तिरस में सराबोर है। बड़े भक्तमाल आश्रम के संस्थापक और श्रीराम के अनन्य भक्त श्री महंत रामशरण दास जी महाराज के 50वें साकेतोत्सव का आयोजन इस बार विशेष रूप से दिव्य भव्य हो रहा है। यह आयोजन ऐसे समय में हो रहा है जब श्रीराम मंदिर निर्माण अपने पूर्णत्व की ओर अग्रसर है, जिससे इस उत्सव का आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व कई गुना बढ़ गया है।अयोध्या की पावन धरती पर इन आध्यात्मिक अनुष्ठानों की सुगंध ने पूरे नगर को भक्तिरस और संस्कृति की इंद्रधनुषीय छटा से आच्छादित कर दिया है।श्री महाराज जी के 50वें साकेतोत्सव का शुभारंभ आज प्रातः 8 बजे मानस नवाह पारायण, भक्तमाल पारायण, चतुर्वेद पारायण, अष्टादश पुराण पारायण एवं नाम संकीर्तन के साथ हुआ। संपूर्ण कार्यक्रम में भक्तमाल मंदिर के बड़े महाराज श्रीमहंत कौशल किशोर दास जी महाराज अपनी सानिध्यता प्रदान कर रहे हैं, जबकि वर्तमान पीठाधीश्वर डा महंत अवधेश कुमार दास जी महाराज कार्यक्रम के संयोजन में सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं।
दिव्य भक्तमाल कथा का उद्घाटन दशरथ राज महल बड़ा स्थान के महंत विंदुगद्यायाचार्य स्वामी देवेन्द्रप्रसादाचार्य, बड़ा भक्त माल के बड़े महाराज श्रीमहंत कौशल किशोर दास व रसिक पीठाधीश्वर श्रीमहंत जन्मेजय शरण महाराज ने संयुक्त रुप से किया। कथा के प्रथम सत्र में जगतगुरु रामानुजाचार्य डॉ. स्वामी राघवाचार्य महाराज ने भक्तों के चरित्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “भक्त ही भगवान को प्रकट होने के लिए बाध्य कर देते है।” उन्होंने बताया कि भक्तमाल महाभागवत श्रीनाभादास जी महाराज की रचना है, जो भक्तों के पावन चरित्रों की सुगंधित माला के समान है। यह माला ऐसी है जिसे स्वयं परमात्मा श्रीहरि अपने कंठ में धारण करते हैं।स्वामी जी ने कहा कि भक्तमाल के श्रवण और मनन से शुष्क हृदय भी सरस हो जाता है तथा भक्ति की लहरें निरंतर आंदोलित रहती हैं। यही कारण है कि श्रीमद्भागवत और रामकथा के प्रवचनों में आचार्यगण भक्तमाल के भक्तों का उदाहरण देकर भक्तिरस को पुष्ट करते हैं।
इस अवसर पर डा महंत अवधेश कुमार दास महाराज ने अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बड़े भक्तमाल जी महाराज भक्ति और प्रेम के प्रतिमूर्ति थे। उनके 50वें साकेतोत्सव पर प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि में सेवा करना और रामभक्तों का सम्मान करना ही हमारा लक्ष्य है।उन्होंने बताया कि यह आयोजन 5 नवंबर तक चलेगा। इस दौरान उनके शिष्य कृष्ण गोपाल दास कार्यक्रम को सफल बनाने में पूर्ण समर्पण के साथ जुटे हुए हैं।
आज की कथा में डॉ सुनीता शास्त्री, महंत रामजी शरण सहित सैकड़ो संत महंत गृहस्थ भक्तगण उपस्थित रहे।
आध्यात्मिकता के सुरों से गुंजायमान हो रहा है बड़ा भक्तमाल मंदिर
अयोध्या। बड़े भक्तमाल महाराज के साकेतोत्सव पर आज रविवार को भक्ति और आध्यात्मिकता के सुरों से गुंजायमान रही। सुबह 8 बजे से बड़ा भक्तमाल मंदिर परिसर में बनी दिव्य एवं भावमयी कुटियों में संत-मनीषी और ब्रह्मचारीजन चारों वेदों, अठारह पुराणों तथा भक्तमाल के पारायण का सस्वर पाठ कर रहे थे। मंत्रोच्चार की गूंज से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत दिखाई दे रहा था।108 ब्राह्मणों द्वारा नवाह पारायण का पाठ जब मंदिर प्रांगण में आरंभ हुआ, तो उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। वैदिक स्वर लहरियों के बीच भक्त अपने आप को धन्य अनुभव कर रहे थे। हर ओर आध्यात्मिक संस्कृति की सुगंध और भक्तिरस की तरंगें व्याप्त थीं।
बड़े भक्तमाल महराज के 50वें साकेतोत्सव पर सम्मानित हुए बटुक विद्यार्थी
अयोध्या। श्रीराम नगरी अयोध्या में बड़े भक्तमाल महंत रामशरण दास जी महाराज के 50वें साकेतोत्सव के शुभारंभ पर रविवार को भक्ति और सेवा का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस अवसर पर पंचकोसी परिक्रमा क्षेत्र में निवास करने वाले सभी बटुक विद्यार्थी और उनके अध्यापकों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया।दोपहर 12 बजे से आयोजित इस पावन समारोह में सभी बटुकों को ससम्मान भोजन कराया गया, अंगवस्त्र भेंट किए गए और द्रव्य दक्षिणा देकर सम्मानित किया गया। यह दृश्य देखकर उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। कार्यक्रम के दौरान बड़े महाराज महंत कौशल किशोर दास जी महाराज की गरिमामयी उपस्थिति रही, वहीं वर्तमान महंत अवधेश कुमार दास जी महाराज ने उन्हें कार्यक्रम की संपूर्ण जानकारी दी।मंदिर परिसर भक्ति, सेवा और अध्यात्म की ऊर्जामयी छटा से आलोकित दिखाई दे रहा था। श्रद्धालुओं का कहना था कि ऐसा आध्यात्मिक संगम बहुत कम देखने को मिलता है, जैसा इस समय बड़े भक्तमाल मंदिर में चल रहे, महंत रामशरण दास जी महाराज के 50वें साकेतोत्सव पर दिखाई दे रहा है। 27 अक्टूबर ,सोमवार को अयोध्या की सेवा में योगदान देने वाले व्यापारियों का सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा।
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