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: रामजन्मोत्सव पर बज रही बधाईयां, रामकथाओं से नगरी गुंजायमान

बमबम यादव

Sat, Apr 13, 2024

अयोध्या में राम नवमी मेला अपने चरम पर, बुधवार को भगवान को होगा प्राकट्य उत्सव

चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ जी के राज महल,मणिराम दास छावनी, हिंदू धाम, रामकृष्ण मंदिर में बह रही रामकथा की रसधार

अयोध्या। रामनगरी में चारों तरह नवाह परायण पाठ, बधाईयां की मंगल ध्वनियां चहुंओर बज रही है। मठ मंदिरों में भगवान के प्राकट्य उत्सव को लेकर तैयारियां जोरो पर है। पूरे नगर को सजाया गया है। हर तरह खुशियां ही खुशियां फैली हुई है। चारों तरह रामकथा व भागवत कथा में संत साधक गोता लगा रहें है। चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ जी के राजमहल बड़ा स्थान में बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेन्द्र प्रसादाचार्य जी महाराज के अध्यक्षता में रामजन्म महोत्सव बड़े ही श्रद्धा भाव के साथ मनाया जा रहा है। जिसमें व्यासपीठ से रामकथा की अमृत वर्षा डा रामानन्द दास जी कर रहे है।इस पूरे आयोजन का दिव्य संयोजन मंगल भवन पीठाधीश्वर महंत कृपालु रामभूषण दास जी कर रहे है।
हिंदू धाम मंदिर में व्यासपीठ से वाल्मीकि रामायण कथा की मीमांसा ब्रह्मर्षि डॉ रामविलास दास वेदांती जी कर रहे है। वेदांती जी ने भरत चरित्र का बड़ा ही सुंदर वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भरत के व्यक्तित्व का दर्शन हमें ‘राम वन गमन’ के पश्चात् ही होता है। उसके पहले उनका चरित्र-मूक समर्पण का अद्भुत दृष्टान्ट है जिसे देख कर कुछ भी निर्णय कर पाना साधारण दर्शक के लिए कठिन ही था। इसी सत्य को दृष्टिगत रखकर गोस्वामी जी ने ‘राम वन-गमन’ के मुख्य कारण के रूप में भरत प्रेम-प्राकट्य को स्वीकार किया। जैसे देवताओं ने समुद्र मंथन के द्वारा अमृत प्रकट किया था ठीक उसी प्रकार राम ने भी भरत-समुद्र का मंथम करने के लिए चौदह वर्षों के विरह का मन्दराचल प्रयुक्त किया। और उससे प्रकट हुआ-राम प्रेम का दिव्य अमृत।
तो वही मणिराम दास छावनी में चैत्र रामनवमी के उपलक्ष में चल रहे 151 विद्वानों द्वारा सस्वर रामायण जी का पारायण पाठ हो रहा है। तो देर शाम प्रख्यात कथावाचक राधेश्याम शास्त्री जी के श्रीमुख से रामकथा की अमृत वर्षा हो रही है। राधेश्याम शास्त्री जी महाराज ने कथा का विस्तार करते हुए कहा शरणागत रक्षक हैं प्रभु। मानस में निहित भगवान श्री राम का चरित ,भक्ति भावना ,धर्म निरूपण ,दर्शन ,जीवन दर्शन तथा नीति आदि के हर पृष्ठ पर ऐसे सुंदर पुष्प विद्यमान हैं जिनसे  निरंतर लोकमंगल की मनोहारी सुगंध निकलती रहती है।उन्होंने कहा कि जय और विजय जब रावण और कुम्भकर्ण के रूप में जन्म लेते हैं, तब उसके मूल में अहंकार की प्रधानता है। पर जब प्रतापभानु रावण बनता है, तब उसके मूल में लोभ की मुख्यता है। इसके सांकेतिक तात्पर्य यह है कि गोस्वामीजी मानो व्यक्ति को सावधान कर देना चाहते हैं कि वह यह सोचकर निश्चिन्त न हो जाय कि रावण एक बुरा व्यक्ति था, बल्कि यह जान ले कि रावणत्व किन परिस्थितियों में जन्म लेता है और यदि उसी प्रकार की मनःस्थिति और परिस्थिति हमारे जीवन में आती है, तो हम भी रावण बन सकते हैं। इसी प्रकार रुद्रगणों की गाथा के माध्यम से यह बतलाया गया है कि परदोष-दर्शन से भी रावणत्व का जन्म होता है तथा वृन्दा की गाथा यह प्रदर्शित करती है कि जब व्यक्ति धर्म से प्राप्त शक्ति को अधर्म के संरक्षण में लगाता है, तो उससे भी रावणत्व पैदा होता है।
रामकृष्ण मंदिर में प्रख्यात कथावाचिका मंदिर की महंत शीतल दीदी रामायणी जी अपने श्रीमुख से राम कथा की अमृत वर्षा कर रही है। कथाव्यास शीतल जी ने कहा कि जीवन जीना सीखना है तो श्री रामायण से सीखो और मरना सीखना है तो भागवत गीता से सीखो।त्रिवेणी संगम में गंगा, जमुना, सरस्वती का मिलन होता है। मिलन में गंगा जमुना तो दिखाई देती हैं लेकिन सरस्वती को कोई नहीं देख पाता, सरस्वती को देखने के लिए कई बार प्रयास करने पड़ते हैं लेकिन सफलता नहीं मिलती। इस महोत्सव का संयोजन महामंडलेश्वर गणेशानंद जी महाराज कर रहे है।

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