Tuesday 24th of February 2026

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सुग्रीव किला के संस्थापक आचार्य के सप्तम वैकुंठोत्सव में धर्म-अध्यात्म : दक्षिणात्य शैली पूजा पद्धति में नित्य छत्र-चंवर व शहनाई वादन के साथ निकाली जा रही पालकी यात्रा, उत्सव में हो रहा विग्रह

सुग्रीव किला के संस्थापक आचार्य के सप्तम वैकुंठोत्सव में धर्म-अध्यात्म की इंद्रधनुषी छटा बिखरी

दक्षिणात्य शैली पूजा पद्धति में नित्य छत्र-चंवर व शहनाई वादन के साथ निकाली जा रही पालकी यात्रा, उत्सव में हो रहा विग्रह पूजन

महोत्सव का समापन 20 फरवरी को पूज्य आचार्य श्री पुष्पांजलि अर्पित व विशाल भंडारे के साथ होगा साथ ही 19 फरवरी को संत सम्मेलन व भजन सम्राट अनूप जलोटा का भजन संध्या भी होगा

अयोध्या। पौराणिक महत्व के स्थल सुग्रीव किला में आयोजित ब्रह्म उत्सव के साथ संस्थापक आचार्य पूज्य जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य के सप्तम वैकुंठोत्सव महोत्सव 11 फरवरी से प्रारंभ हो गया है,जिसका समापन 20 फरवरी को पूज्य आचार्य श्री पुष्पांजलि अर्पित व विशाल भंडारे के साथ होगा। कार्यक्रम में 19 फरवरी को संत सम्मेलन व भजन सम्राट अनूप जलोटा का भजन संध्या होगा। इसी के साथ यहां भगवान श्रीसीताराम एवं हनुमानजी समेत पूर्वाचार्य के विग्रह पूजन कार्यक्रम चल रहा है। महोत्सव के पांचवें दिन धर्म-अध्यात्म की इंद्रधनुषी छटा बिखरी। प्रात: से पूर्वाह्न तक बड़ी संख्या में वेदपाठियों ने विष्णु सहस्त्रनाम का पारायण शुरू किया। समवेत स्वर में भगवान के विविध नामों का उच्चारण आध्यात्मिक चेतना का वाहक सिद्ध हो रहा था। इसी के साथ ही भगवत नाम दक्षिणपंथी परम्परा से हो रही है जिसकी मंगलमयी ध्वनि अनंत आकाश में विलीन होकर परासत्ता से समीकृत कर रही थी। आश्रम में नित्य भगवान की भव्य पालकी यात्रा निकाली जाती है।

सुग्रीव किला के पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य विश्वेश प्रपन्नाचार्य जी ने कहा कि योगिराज देवरहा बाबा के शिष्य व सुग्रीव किला संस्थापक आचार्य पूज्य जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज ने उन्हीं के आदेश से यहां वर्ष 1973 में श्री रामज्योति जलाई थी। उन्ही के ही आदेश से देवरहा बाबा के शिष्य व तत्कालीन विहिप सुप्रीमो आशोक सिंहल ने 1989 मे देशभर के तीन लाख से अधिक गांवों में रामज्योति पहुंचा कर राम मंदिर आन्दोलन की अलख जगाई। जगद्गुरु रामानुजाचार्य विश्वेश प्रपन्नाचार्य जी ने बताया कि उनके गुरुदेव संस्थापक आचार्य की राम मंदिर आन्दोलन में बड़ी भूमिका थी लेकिन वह स्वयं भव्य राम मंदिर का निर्माण नही देख पाये। आज भव्य मंदिर में हमारे रामलाल विराजमान हो गये है।हमारे गुरुदेव का सपना साकार हो गया। वो जहां भी होगे बहुत खुश होगे। हम सभी पर गुरुदेव की कृपा सदैव बनी रहेगी। कार्यक्रम की जानकारी देते हुए जगद्गुरु रामानुजाचार्य विश्वेश प्रपन्नाचार्य जी ने कहा कि दक्षिणात्य शैली में पूजा पद्धति हो रही है नित्य छत्र चंवर व शहनाई वादन के साथ पालकी यात्रा निकाली जाती है। उत्सव में विग्रह पूजन हो रहा है।

स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य जी उन चुनिंदा धर्माचार्य में थे जिन्होंने मंदिर आंदोलन की नींव मजबूत करने से लेकर उसे शिखर का स्पर्श करा दिया। उन्होंने बताया कि ब्रह्म उत्सव के साथ संस्थापक आचार्य पूज्य जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य के सप्तम वैकुंठोत्सव महोत्सव में भजन सम्राट अनूप जलोटा सहित तमाम कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे। पूज्य गुरुदेव साधना में उन्मीलित दिग्गज संत तो थे ही उन्होंने पूरी जिम्मेदारी के साथ मंदिर आंदोलन की अपनी करुणा से अभिसिंचित किया।सुग्रीव किला से आज भव्य शोभायात्रा नगर भ्रमण करने निकली, जो पुनः मंदिर वापस आयी। सुग्रीव किला में मंच सज्जा परिधान विन्यास संवाद अदायगी और सहज भंगिमा से दक्षिणात्य शैली ने अपनी अमिट छाप छोड़ी।कार्यक्रम की देखरेख किला के पुजारी अन्नत पदनाभाचार्य जी कर रहे है।

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