Thursday 20th of August 2026

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23वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में दिगंबर अखाड़ा में श्रद्धा, स्मृति और भक्ति का त्रिवेणी संगम हुआ

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'रामेश्वरमय' हुई श्रीराम की नगरी : राम नाम के साथ करतलिया बाबा का अनुराग भोलेनाथ में भी अटूट था और बाबा ने ही मां के तट पर स्थित शिवलिंग का शिरोचार्य किया

'रामेश्वरमय' हुई श्रीराम की नगरी

महाशिवरात्रि पर अयोध्या में गूंजा हर-हर महादेव का महाघोष, अयोध्या पहुंचे लाखों श्रद्धालु, सीएम योगी के निर्देश पर सुरक्षा व्यवस्था रही तगड़ी

प्रसिद्ध नागेश्वर नाथ मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़

करतलिया बाबा हमेशा श्री राम नाम भक्ति में ओत प्रोत रहते थे: महंत बालयोगी रामदास

राम नाम के साथ करतलिया बाबा का अनुराग भोलेनाथ में भी अटूट था और बाबा ने ही मां के तट पर स्थित शिवलिंग का शिरोचार्य किया

अयोध्या। श्रीहरि की साकेत नगरी अयोध्या रविवार को भगवान राम के भी ईश्वर यानी 'रामेश्वर' को समर्पित हो गई। भोर के तीन बजे से ही हर-हर महादेव के महाघोष और भोले शंकर के जयकारों के बीच शिव भक्तों का सैलाब पहले सरयू नदी के घाट पर और इसके बाद शिव मंदिरों उमड़ पड़ा। प्रातः से ही सरयू में डुबकी लगाकर भक्त अपने आराध्य भोलेनाथ के दर्शन को आतुर दिखे। शिवरात्रि पर अयोध्या में जुटने वाली लाखों की भीड़ को देखते हुए योगी सरकार ने सुरक्षा चक्र को काफी मजबूत कर दिया था। सभी संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षाकर्मी तैनात रहे। रूट डायवर्सन के माध्यम से भीड को नियंत्रित किया गया। वहीं राममंदिर में दर्शनार्थियों के लिए सुगम दर्शन की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई थी।

सरयू तट पर विराजमान करतलिया बाबा हमेशा श्री राम नाम भक्ति में ओत प्रोत रहते थे। राम नाम के साथ बाबा का अनुराग भोलेनाथ में भी अटूट था और बाबा ने ही मां के तट पर स्थित शिवलिंग का शिरोचार्य किया और यह परंपरा निरंतर चलने लगी।बाबा भुनेश्वरनाथ महादेव प्राचीनता की पुष्टि उस सतह से होती है जिस पर वह शिवलिंग स्थापित है और वर्षों पहले करतलिया बाबा ने सहेजा और उनके शिष्य सूर्यनारायण दास ने मंदिर का निर्माण करवाया और वर्तमान पीठाधीश्वर महंत बाल योगी रामदास जी महाराज ने बाबा भोले के दरबार को और भी दिव्य भव्य मंदिर बनवा दिया। भोले के दरबार में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए धर्मशाला का निर्माण करवाया। मां सरयू की उत्पत्ति श्री हरि के आंसुओं से हुई है और सरयू तट पर विराजमान भुनेश्वर नाथ महादेव का नित्य प्रति श्रद्धालु भक्तगण मां सरयू के जल से अभिषेक करके पुण्य अर्जित कर रहे हैं। करतलिया बाबा आश्रम के महंत बालयोगी रामदास जी महाराज ने बताया की प्रभु श्री राम और भोले बाबा एक दूसरे को श्रेष्ठ मानते हैं और उनकी अभिन्नता शास्त्रों के साथ-साथ सिद्ध संत करतलिया बाबा ने साक्षात पहचानी है जो आज मां सरयू के तट पर बाबा भुनेश्वर नाथ महादेव के रूप में विराजमान है। रामचरितमानस में तुलसीदास जी महाराज ने कई बार प्रभु श्री राम और बाबा भोलेनाथ का वर्णन किया है और ऐसा माना जाता है कि अगर कोई राम जी का अपमान करके शिवजी को अपनाता है या शिव जी का अपमान करके राम जी को अपनाता है तो उसे किसी की भक्ति नहीं प्राप्त होती है। बल्कि दोनों आराध्य ऐसे भक्तों पर रुष्ट हो जाते हैं।

अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर में प्रभु की प्राण प्रतिष्ठा होने के बाद यह दूसरी महाशिवरात्रि है, महाकुंभ होने के कारण अयोध्या में श्रद्धालुओं का जैन सैलाब उमड़ा रहा। इसलिए भोले के उपासक इसे और भी खास मान रहे हैं। बता दें कि भगवान श्रीराम जहां महादेव को अपना ईश्वर बताते हैं और उनके ज्योतिर्लिग की स्थापना करते हैं, वहीं देवाधिदेव शिव भी हनुमान के रूप में रुद्रावतार लेकर रामकाज और प्रभु भक्ति का प्रतिमान गढ़ देते हैं। श्रीराम और शिव के बीच इस अलौकिक संबंध की झलक अयोध्या में हर जगह बिखरी दिखाई दी। नगर के विभिन्न शिवालयों में भोर से ही श्रद्धा और भक्ति में सराबोर शिव भक्तों की लंबी कतार देखने को मिली।

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