अचानक समाजवादी पार्टी की जिला व महानगर कमेटी भंग : पार्टी नेतृत्व ने अनुशासनहीनता और संगठनात्मक कमजोरियों के कारण यह कदम उठाया,सांसद से लेकर जिलाध्यक्ष तक हैरत में
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Thu, Dec 11, 2025
अचानक समाजवादी पार्टी की जिला व महानगर कमेटी भंग
सांसद से लेकर जिलाध्यक्ष तक हैरत में
समाजवादी पार्टी में बड़ा राजनीतिक उलटफेर हुआ है। प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल ने राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर अयोध्या की कार्यकारिणी को भंग कर दिया। इस फैसले से सपाइयों में खलबली मच गई है। पार्टी नेतृत्व ने अनुशासनहीनता और संगठनात्मक कमजोरियों के कारण यह कदम उठाया
अयोध्या। समाजवादी पार्टी में गुरुवार को बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला। सपा प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल ने राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर अयोध्या जिले व महानगर दोनों की कार्यकारिणी को तत्काल प्रभाव से भंग करने का पत्र जारी कर दिया। अचानक हुए इस फैसले से अयोध्या जिले के सपाइयों में खलबली मच गई है। सूत्रों के अनुसार,पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव अयोध्या के नेताओं और कार्यकर्ताओं की अंदरूनी खींचतान तथा अनुशासनहीनता से नाराज चल रहे थे। संगठनात्मक कमजोरियों और लगातार मिल रही शिकायतों के बाद आखिरकार शीर्ष नेतृत्व ने कड़ा कदम उठाते हुए पूरी कार्यकारिणी को भंग कर दिया।
अचानक समाजवादी पार्टी की जिला कमेटी व महानगर कमेटी को प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल ने भंग कर दिया गया। अचानक जिला व महानगर कमेटी को भंग करना पत्रकार राममूर्ति यादव पर हमले के ताजा घटनाक्रम का हिस्सा माना जा रहा है। पत्रकार का हमलावर गौरव पांडेय जिला कमेटी में सचिव रहा। सांगठनिक कार्रवाई से सांसद अवधेश प्रसाद, पूर्व मंत्री तेजनारायण पांडेय पवन व जिलाध्यक्ष पारसनाथ यादव तक प्रदेश अध्यक्ष के निर्णय से अचरज में हैं। जिलाध्यक्ष का भी संगठन में किसी क्षत्रप से विवाद भी नहीं रहा। इसीलिए ताजा घटनाक्रम से पत्रकार पर पार्टी पदाधिकारी के हमले को उसकी वजह माना जाने लगा है। चर्चा यह भी है कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दो दिसंबर को सुबह पत्रकार से मोबाइल पर हमले का फीडबैक लेकर हर संभव मदद का आश्वासन दिया। राममूर्ति पर हमला 29 नवंबर की सायं को हुआ था। गंभीर रूप से घायल पत्रकार को जिला चिकित्सालय भर्ती कराया गया था। पुलिस ने बाद में पत्रकार के जिन हमलावरों को गिरफ्तार किया उसमें समाजवादी पार्टी के जिला सचिव गौरव पांडेय भी शामिल रहा। पत्रकार पर हमले की कड़ियां मिर्जापुरमाफी में एक पार्टी नेता के गृह प्रवेश के घटनाक्रम से जोड़ा जाने लगा जिसमें गौरव से हाथापायी हुई थी।
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