राम मंदिर केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर है : कहा, ध्वजारोहण का सौभाग्य पाकर वे अभिभूत हैं, सभी पूर्वजों को नमन जिन्होंने 500 वर्षों तक श्रीराम जन्मभूमि के लिए संघर्ष
admin
Tue, Dec 9, 2025
राम मंदिर केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर है: महंत केशवदास
कहा, ध्वजारोहण का सौभाग्य पाकर वे अभिभूत हैं, सभी पूर्वजों को नमन जिन्होंने 500 वर्षों तक श्रीराम जन्मभूमि के लिए संघर्ष किया
अयोध्या। भगवान श्रीराम लला के मंदिर निर्माण पूर्ण होने पर पंजाबी आश्रम के पीठाधीश्वर महंत केशव दास महाराज भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि राम मंदिर केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर है। सनातन धर्म में प्रत्येक माता-पिता अपने बच्चे में श्रीराम जैसा आदर्श चरित्र देखना चाहते हैं और उसी भावना से उसका पालन-पोषण करते हैं।महंत केशव महाराज ने बताया कि ध्वजारोहण का सौभाग्य पाकर वे अभिभूत हैं। उन्होंने उन सभी पूर्वजों को नमन किया जिन्होंने 500 वर्षों तक श्रीराम जन्मभूमि के लिए संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि यदि उनका संघर्ष न होता तो आज यह ऐतिहासिक दिन देखना संभव न होता। प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में सम्मिलित होना उनके लिए जीवन का सौभाग्य है। श्री दास ने स्पष्ट कहा कि संत राजनीति से दूर रहते हैं, पर सनातन धर्म की रक्षा करने वालों का साथ अवश्य देते हैं। बाबरी मस्जिद के नाम पर विवाद को लेकर उन्होंने कहा कि मस्जिद से उन्हें आपत्ति नहीं, परंतु ‘बाबरी’ नाम से ऐतराज है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि मस्जिद बनानी हो तो उसका नाम किसी देशभक्त मुस्लिम अब्दुल कलाम या अब्दुल हमीद के नाम पर रखा जा सकता है।
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