Wednesday 19th of August 2026

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राम जन्मोत्सव से पहले भक्ति में डूबी अयोध्या, जानकी महल ट्रस्ट बना : संस्कृत धुनों और भक्ति संगीत से गूंजा सरयू तट, 27 मार्च को धूमधाम से मनाया जाएगा प्रभु श्रीराम का जन्मोत्सव

राम जन्मोत्सव से पहले भक्ति में डूबी अयोध्या, जानकी महल ट्रस्ट बना आकर्षण का केंद्र

संस्कृत धुनों और भक्ति संगीत से गूंजा सरयू तट, 27 मार्च को धूमधाम से मनाया जाएगा प्रभु श्रीराम का जन्मोत्सव

अयोध्या। राम नगरी की पुण्यभूमि एक बार पुनः रामनाम की मधुर गूंज से आलोकित है। सरयू तट पर बसी यह दिव्य नगरी इन दिनों श्रद्धा, आस्था और सांस्कृतिक वैभव का अद्भुत संगम बनी हुई है। मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम के जन्मोत्सव की पावन बेला निकट आते ही संपूर्ण वातावरण भक्तिरस में डूब गया है। मंदिरों की घंटियों, वैदिक मंत्रोच्चार और भक्ति गीतों की स्वर लहरियाँ हर दिशा में आध्यात्मिक चेतना का संचार कर रही हैं।

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण उपरांत अयोध्या में श्रद्धालुओं का सैलाब निरंतर उमड़ रहा है, जिससे नगर की धार्मिक आभा और भी प्रखर हो उठी है। इसी आध्यात्मिक परिदृश्य में स्थित जानकी महल ट्रस्ट इन दिनों विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। माता सीता के मायके स्वरूप प्रतिष्ठित यह धाम मिथिला परंपरा की सजीव झांकी प्रस्तुत करता है, जहाँ प्रत्येक अनुष्ठान और उत्सव उसी सांस्कृतिक शैली में संपन्न होता है। यह पूरा उत्सव ट्रस्टी आदित्य सुल्तानिया के संयोजन में मनाया जा रहा है।

बुधवार को, जन्मोत्सव से पूर्व, संस्कृत धुनों की सुमधुर प्रस्तुति ने वातावरण को ऐसा आलोकित किया कि मानो स्वयं देवगण अवतरित हो उठे हों। श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर इस दिव्य अनुभूति में डूबते चले गए। नागपुर की युवा संगीत मंडली ‘द अनहद’ ने अपनी प्रस्तुति से भक्ति और आधुनिकता का सुरम्य समन्वय प्रस्तुत किया, जो उत्सव को नई ऊँचाइयों तक ले जा रहा है।

आगामी 27 मार्च को दुल्हा सरकार श्रीराम का जन्मोत्सव अत्यंत धूमधाम और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर विशेष पूजन-अर्चन, प्रसाद वितरण तथा विविध धार्मिक आयोजनों की भव्य श्रृंखला आयोजित होगी। उल्लेखनीय है कि जन्मोत्सव के पश्चात भी उत्सव की यह अविरल धारा छह दिनों तक प्रवाहित होती रहेगी। अंततः ‘भगवान की छठ उत्सव’ की परंपरा के साथ इस दिव्य आयोजन का समापन होगा, जो श्रद्धालुओं के हृदय में दीर्घकाल तक स्मृतियों में अंकित रहेगा।

अयोध्या आज केवल एक नगर नहीं, बल्कि जीवंत आस्था, परंपरा और संस्कृति का आलोकित प्रतीक बन चुकी है—जहाँ हर क्षण, हर स्वर और हर श्वास में श्रीराम का ही वास है।

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