Sunday 5th of July 2026

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संगठन में जिलाध्यक्ष की तलाश तेज, 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पीडीए : अखिलेश यादव के निर्देश पर जिला इकाई पहले ही भंग की जा चुकी; नन्हकन यादव, संजय यादव व कृष्ण कुमार पटेल प्रमुख दावेदार

संगठन में जिलाध्यक्ष की तलाश तेज, 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पीडीए समीकरण पर मंथन

अखिलेश यादव के निर्देश पर जिला इकाई पहले ही भंग की जा चुकी; नन्हकन यादव, संजय यादव व कृष्ण कुमार पटेल प्रमुख दावेदार, बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने पर जोर

अयोध्या। विधानसभा चुनाव 2027 की उल्टी गिनती हुई हो गई है। राजनैतिक दल अपने अपने दल को बूथ स्तर पर दुरुस्त करने में जुट गए। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव का मनोबल इस समय काफी मजबूत दिख रहा है। लोकसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत को दोहराने के लिए सपा ने अभी से ही अपने कील काटें दुरुस्त करने में लग गई है। पीडीए को धार देने व पार्टी को बूथ स्तर पर मजबूत करने के उद्देश्य से जिले के कमान इस बार अखिलेश यादव अपने मजबूत सिपाही को देने का मन बना चुके है। जो पार्टी को जन जन व बूथ स्तर पर और अधिक मजबूत कर सकें, इसको लेकर सपा मुखिया लगातार जिलें के खाटी समाजवादियों से फीडबैक ले रहें है।

अखिलेश यादव के निर्देश पर समाजवादी पार्टी की अयोध्या महानगर और जिला इकाई भंग होने के बाद से संगठन नए जिला अध्यक्ष की तलाश में जुटा है। कई महीनों से चल रही इस कवायद में अब पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण को ध्यान में रखते हुए मजबूत और सर्वस्वीकार्य चेहरे की तलाश तेज हो गई है। पार्टी नेतृत्व की प्राथमिकता स्पष्ट है—2026 के पंचायत चुनाव और 2027 के विधानसभा चुनाव में अयोध्या जिले की पांचों सीटों पर जीत सुनिश्चित करना।स्थानीय स्तर पर वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं से फीडबैक लिया जा रहा है, वहीं प्रदेश और राष्ट्रीय इकाई भी जातीय संतुलन, संगठनात्मक अनुभव और जमीनी पकड़ का आकलन कर रही है। माना जा रहा है कि इस बार संगठन ऐसे नेता को कमान सौंपना चाहता है, जो कार्यकर्ताओं को एकजुट रखते हुए बूथ स्तर तक मजबूत नेटवर्क तैयार कर सके।

सूत्रों के मुताबिक जिला अध्यक्ष पद की दौड़ में नन्हकन यादव का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है। करीब 30 वर्षों से सक्रिय राजनीति में जुड़े नन्हकन यादव का पारिवारिक राजनीतिक आधार भी मजबूत रहा है। उनके पिता तिहुरा मांझा ग्राम सभा के प्रधान रहे हैं। स्नातक शिक्षित नन्हकन यादव 2012 से 2017 तक जिला कार्यकारिणी सदस्य रहे और बाद में जिला सचिव का दायित्व भी संभाला। वर्ष 2015 और 2021 में जिला पंचायत सदस्य का चुनाव भी लड़ चुके हैं।पार्टी के विभिन्न चुनावों में सक्रिय भूमिका निभाते हुए उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा प्रत्याशी अवधेश प्रसाद के समर्थन में जी-तोड़ मेहनत की। उस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को अयोध्या सीट पर कड़ी टक्कर मिली। समर्थकों का दावा है कि नन्हकन यादव की जुझारू शैली और कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद उनकी सबसे बड़ी ताकत है।

इसी क्रम में संजय यादव का नाम भी चर्चा में है। छात्र राजनीति से उभरे संजय यादव साकेत महाविद्यालय में छात्रसंघ अध्यक्ष रह चुके हैं। जिला पंचायत सदस्य के रूप में भी उनका अनुभव रहा है। युवाओं और छात्र वर्ग में उनकी पकड़ को संगठन के लिए लाभकारी माना जा रहा है।पीडीए की रणनीति के तहत अधिवक्ता कृष्ण कुमार पटेल भी दावेदारों में गिने जा रहे हैं। लंबे समय से पार्टी से जुड़े कृष्ण कुमार पटेल संगठनात्मक कार्यों में सक्रिय रहे हैं और विभिन्न चुनावों में प्रत्याशियों के साथ अहम भूमिका निभा चुके हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि उनका सामाजिक और शैक्षिक जुड़ाव उन्हें एक संतुलित विकल्प बनाता है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अयोध्या जिले की पांचों विधानसभा सीटों पर जीत के लिए संगठन को ऐसा जिला अध्यक्ष चाहिए जो जातीय समीकरण साधने के साथ-साथ बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर सके। आने वाले दिनों में प्रदेश नेतृत्व की सहमति के बाद नए जिला अध्यक्ष की घोषणा संभव है। फिलहाल संगठन में मंथन और समीकरणों का दौर जारी है।

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