उदासीन ऋषि आश्रम में मनाई गई भगवान उदासीनाचार्य की जयंती : भगवान श्रीचंद की मूर्ति का हुआ पूजन, अभिषेक और महाआरती की गई
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Tue, Sep 2, 2025
उदासीन ऋषि आश्रम में मनाई गई भगवान उदासीनाचार्य की जयंती
भगवान श्रीचंद की मूर्ति का हुआ पूजन, अभिषेक और महाआरती की गई
भगवान श्रीचंद ने गहन तपस्या कर अखंड भारत में लोक कल्याण किया- महंत भरत दास
अयोध्या। रामनगरी के प्रतिष्ठित पीठों में शुमार बाबा संगत बक्श जी की तपोभूमि श्रीउदासीन ऋषि आश्रम रानोपाली में भगवान श्रीचंद की 531वीं जयंती आज बड़े ही धूमधाम से मनाई गई। उदासीन संप्रदाय के संस्थापक भगवान श्री चंद्र जी का पूरा जीवन सनातन धर्म के प्रचार व प्रसार में समर्पित रहा। मंदिर में विराजमान भगवान श्रीचंद की मूर्ति का पूजन, अभिषेक और आरती कर हवन-पूजन किया गया। उदासीन ऋषि आश्रम रानोपाली के श्री महंत डा भरत दास जी महाराज ने भगवान की आरती कर प्रसाद भक्तों में वितरित किया।पूजन में महंत धर्मदास, प्रधानाचार्य रामभद्र दास,अभिषेक जी आश्रम से जुड़े भक्त प्रमुख रूप से शामिल होकर श्री आचार्य का पूजन अर्चन किया।
इस अवसर पर महंत भरत दास जी महाराज ने कहा कि जिसके हृदय में बह्म का निवास वह उदासीन है। महंत भरत दास ने कहा कि इस आश्रम में सनातन परंपरा को प्रफुल्लित, धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन, गुरुकुल प्रथा को जीवित रखने व समाज की सेवा के लिए कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उदासीनाचार्य भगवान श्री चंद्र जी महाराज का जन्म प्रादुर्भाव भाद्रपद शुक्ल नवमी विक्रम संवत 1551 में गुरु नानक देव जी के घर हुआ। श्री चंद्र जी महाराज आत्मनिष्ठ दृढ़ सकंप्ल योग साधाना व पारदर्शिता के धनी थे। भगवान श्री चंद्र महाराज ने जन कल्याणार्थ अनेक रचनाएं की हैं। सभी को एकता के सूच में बांधते हुए आचार्य श्री समन्वयवाद की स्थापना की। 149 वर्षो तक धर्म का प्रचार करते हुए अनंतधीन हो गए। उदासीन गुरु परंपरा में उनका 165 वां स्थान है। वे गुरु गुरू नानक के पुत्र हैं। जिस अवस्था में बालक खेलकूद में लगे रहते हैं भगवान श्रीचंद ने एकांत वन में गहन तपस्या कर अखंड भारत में लोक कल्याण किया। वे अपने आशीर्वाद से दुखी लोगों का कल्याण करते रहते। जयंती के अवसर पर आयोजित भंडारा महोत्सव में दिगंबर अखाड़ा के महंत रामलखन दास, जानकी घाट बड़ा स्थान के रसिक पीठाधीश्वर महंत जन्मेजय शरण, बड़ा भक्तमाल के महंत अवधेश कुमार दास, नागा रामलखन दास शामिल हुए।
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