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: विनेश की सहानुभूति से बड़ी है शिवानी के दर्द की दास्तां

बमबम यादव

Thu, Aug 15, 2024
50 किग्रा वर्ग में राष्ट्रीय चैंपियन शिवानी नहीं जा सकी थीं ओलिंपिक इसी वजन वर्ग में ओलिंपिक गई विनेश अधिक वजन के कारण अयोग्य घोषित हुई इंदौर। ओलिंपिक में वजन 100 ग्राम अधिक होने से अयोग्य करार दी गई पहलवान विनेश फोगाट के दर्द के बीच हमें मध्य प्रदेश की उस महिला पहलवान शिवानी के दर्द को भी याद करना चाहिए, जो ओलिंपिक न जा पाईं। जिस 50 किग्रा वजन वर्ग में विनेश ओलिंपिक पहुंची, उसी वर्ग में शिवानी जा सकती थी। किंतु नियति का खेल कहें या शिवानी का दुर्भाग्य, वह गुमनाम रह गईं। यह कहानी मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल क्षेत्र छिंदवाड़ा के गांव उमरेठ की बेटी शिवानी की है। अपने गांव की ही तरह यहां जन्मी शिवानी पंवार भी गुमनाम ही हैं। कम लोग ही जानते होंगे कि यह लड़की राष्ट्रीय कुश्ती चैंपियन है। प्रदर्शन ऐसा कि बीते तीन साल से देश की कोई महिला पहलवान शिवानी से खिताब छीन न सकी है। एशियन चैंपियनशिप में इसी शिवानी ने तीन बार की विश्व चैंपियनशिप की पदक विजेता पहलवान को पटखनी दी थी और भारत के लिए पदक जीत लाई थी। ऐसे धमाकेदार प्रदर्शन के बावजूद यह लड़की ओलिंपिक न जा सकी, क्योंकि जिस 50 किग्रा वर्ग में इसने यह कमाल दिखाया, इसी वजन वर्ग में ओलिंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व इनके बजाय विनेश फोगाट को मिला। विनेश 100 ग्राम वजन अधिक होने से अयोग्य घोषित की गई हैं। शिवानी पंवार तीन साल से ओलिंपिक की तैयारी में जुटी थीं, लेकिन जमाम रुकावटों ने मौका मिलने न दिया। अन्याय के खिलाफ भारतीय कुश्ती संघ और ओलिंपिक संघ से लेकर अंतरराष्ट्रीय कुश्ती संघ तक संघर्ष किया, किंतु विपक्षी पहलवानों को पटखनी देने वाली बेटी व्यवस्था से मात खा गई। शिवानी इसके बाद किर्गिस्तान के बिश्चेक में हुई एशियाई महिला कुश्ती चैंपियनशिप में भी 50 किग्रा वर्ग में भारत का प्रतिनिधित्व किया और कई दिग्गज पहलवानों को हराकर कांस्य पदक जीता था। शिवानी बताती हैं, मै किसी पहलवान के खिलाफ नहीं, लेकिन स्थियों का पालन होना चाहिए। इसी साल पटियाला में ओलिंपिक क्वालिफिकेशन के लिए आइओए ने ट्रायल्स कराए थे। अंतरराष्ट्रीय कुस्ती संघ का नियम है कि पहलवान किसी एक वजन वर्ग में खेल सकता है, लेकिन वहां विनेश के पक्ष में नियमों को दरकिनार कर दिया गया। विनेश को दो वजन वर्गों में खिलाया गया। वह 50 किग्रा वर्ग में भी खेली और 53 किग्रा वर्ग में भी। उनके लिए 50 किग्रा वर्ग के मुकाबले करीब चार घंटे रोक दिए गए। जब मैंने इसका विरोध करते हुए कहा कि ऐसे ही चला तो मैं कुश्ती नहीं लड़ेंगी, तब जाकर मुकाबले कराए गए। इसके बाद भी मेरे साथ न्याय नहीं हुआ। में मुकाबले में करीब पांच अंक के अंतर से आगे थी, लेकिन अचानक से मेरे खिलाफ अंक दिए गए और अंत में विनेश को विजेता घोषित कर दिया गया। मैंने इसके खिलाफ भारतीय कुश्ती संघ और भारतीय ओलिंपिक संघ को भी शिकायत दर्ज कराई थी। आइओए ने स्वीकारा कि दो वर्गों में लड़ने का नियम नहीं है, लेकिन अब हमने यह मामला कुश्ती संघ को सौंप दिया है। इसके बाद मैंने अंतरराष्ट्रीय कुश्ती संघ में भी शिकायत की थी, लेकिन उनका कहना था कि यह आपका आंतरिक मामला है और राष्ट्रीय कुश्ती संघ से चुर्चा करें। मगर कहां से कोई जवाब नहीं मिला।

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