भक्ति के सभी मार्ग परमात्मा तक पहुंचाते हैं: डॉ राघवाचार्य : बड़े भक्तमाल महाराज के साकेतोत्सव में अयोध्या के व्यापारियों को किया गया सम्मान
admin
Mon, Oct 27, 2025
भक्ति के सभी मार्ग परमात्मा तक पहुंचाते हैं: डॉ राघवाचार्य
बड़े भक्तमाल महाराज के साकेतोत्सव में अयोध्या के व्यापारियों को किया गया सम्मान
व्यापारी के रूप में अयोध्या के विधायक वेद प्रकाश गुप्ता, रुदौली विधायक रामचंद्र यादव सहित हजारों व्यापारी हुए सम्मिलित
अयोध्या।रामनगरी के बड़े भक्तमाल मंदिर के संस्थापक आचार्य श्री महंत रामशरण दास जी महाराज बड़े भक्तमाल के 50 वें साकेतोत्सव पर सोमवार को भगवान श्री राम की पावन नगरी में अपनी सेवा देने वाले व्यापारियों को बड़े भक्तमाल आश्रम के बड़े महत कौशल किशोर दास महाराज के सानिध्यता में महंत डा अवधेश कुमार दास महाराज अंग वस्त्र भेंट कर सम्मानित किया।व्यापारियों ने भी महाराज जी को स्मृति चिन्ह और साल भेंट कर अभिवादन किया। बड़े भक्तमाल मंदिर में संस्थापक महंत रामशरण दास महाराज के 50 वें साकेतोत्सव पर नव दिवसीय भव्य कार्यक्रम चल रहा है, सुबह से देर रात तक मंदिर में भक्तों का जमावड़ा लगा रहता है कार्यक्रम की सुबह प्रतिदिन नवाह पारायण, चतुर्वेदी पारायण, भक्तमाल पारायण और 18 पुराणों के पारायण से होता है। दोपहर में प्रत्येक दिन अयोध्या की सेवा करने वाले अलग-अलग लोगों को सम्मानित किया जाता है। इसी क्रम में आज अयोध्या के व्यापारियों का सम्मान किया गया जिसमें अयोध्या नगर विधायक और व्यापार में अपना प्रतिमान स्थापित करने वाले वेद प्रकाश गुप्ता, रुदौली विधायक रामचंद्र यादव, होटल व्यवसाय अनिल अग्रवाल, व्यापार मंडल अयोध्या के अध्यक्ष पंकज गुप्ता, महासचिव नंदलाल गुप्ता, समाजवादी व्यापार प्रकोष्ठ के महानगर अध्यक्ष शक्ति जयसवाल,विनोद श्रीवास्तव, अनूप गुप्ता, अचल गुप्ता, भारत लाल गुप्ता, किशोरी रमण अग्रवाल, सुरेश गुप्ता, सुशील जायसवाल, पवन चौरसिया, विनोद पाठक सहित सैकड़ो व्यापारीयों को अंग वस्त्र भेंट कर महंत डा अवधेश कुमार दास महाराज ने स्वागत किया और सभी का आभार व्यक्त किया।
सायंकाल के सत्र में रामलीला सदन देवस्थानम के पीठाधीश्वर जगतगुरू रामानुजाचार्य डॉ स्वामी राघवाचार्य महाराज ने भक्तमाल की कथा को आगे बढ़ते हुए बताया कि भक्ति के दो मुख्य रूप हैं, सगुण भक्ति और निर्गुण भक्ति, सगुण भक्ति में भक्त भगवान को साकार रूप में पूजता है जैसे श्रीराम, श्रीकृष्ण, श्रीहरि। निर्गुण भक्ति में ईश्वर को निराकार, सर्वव्यापक शक्ति के रूप में माना जाता है, दोनों ही मार्ग परमात्मा तक पहुँचाते हैं; अंतर केवल साधना के ढंग में है। श्री महाराज जी ने भक्त प्रह्लाद, ध्रुव, अमरीश, विदुर, हनुमान जी, शबरी, गजेंद्र, आदि भक्तों की कथा को विस्तार से वर्णन किया। कथा श्रवण कर रहें संत महंत भक्तगण भाव विभोर हो गए। कथा के विश्राम के बाद आरती उतारी गई भक्तों में प्रसाद वितरण किया गया। अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए महंत डा अवधेश कुमार दास ने कहा कि पूर्वाचार्यों के शक्ति से ही यह कार्य संपन्न हो रहा है, अयोध्या की पंचकोसी परिक्रमा के अंतर्गत जितने भी लोग रहते हैं किसी न किसी रूप में वह भगवान प्रभु श्री राम की ही सेवा करते हैं सेवा का ढंग अलग हो सकता है लेकिन वह होती है सेवा है, इसी उद्देश्य से जो राम जी की सेवा करते हैं उनका एक ही दिन सही अगर सेवा का अवसर मिल रहा है तो यह मेरा सौभाग्य है। मंगलवार को पुरोहित समाज का सम्मान किया जाएगा। श्री महाराज जी के साथ उनके शिष्य कृष्ण गोपाल दास महाराज निरंतर सभी की सेवा में लगे रहे।
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