: हनुमानगढ़ी से निकली तिरंगा यात्रा, नागा साधुओं ने लगायें भारत माता के गगनभेदी नारे
बमबम यादव
Thu, Aug 15, 2024
संकट मोचन सेना अध्यक्ष महंत संजय दास के नेतृत्व व वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास के संयोजन में निकली ऐतिहासिक तिरंगा यात्रा
नागाओं के साथ रामनगरी के साधु संत व्यापारी व आमजन भी शामिल हुए यात्रा में
अयोध्या। आजादी का जश्न मानने निकले हनुमानगढ़ी के सौकड़ो नागा साधुओं के साथ रामनगरी के विशिष्ट संत, व्यापारी व आमजन हाथों तिरंगा झंडा लेकर भारत माता के जय की गगनभेदी नारों के साथ दिलों में देशभक्ति की भावनाओं से ओतप्रोत होकर हनुमानगढ़ी के निकास द्बार से तिरंगा यात्रा में निकले। इस ऐतिहासिक तिरंगा यात्रा का नेतृत्व संकट मोचन सेना अध्यक्ष महंत संजय दास महाराज कर रहें थे। यात्रा का संयोजन हनुमानगढ़ी के वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास महाराज ने किया था। यह यात्रा ओम प्रकाश बैरियर के रास्ते दंत धावन कुंड तिराहा होते हुए सेन्ट्रल बैक तिराहे के रास्ते पुनः हनुमानगढ़ी अयोध्या आयी।
संकट मोचन सेना अध्यक्ष महंत संजय दास महाराज ने कहा कि आज हम यहाँ हमारे महान देश भारत की स्वतंत्रता का जश्न मनाने के लिए एकत्रित हुए हैं। सबसे पहले, मैं उन सभी स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करना चाहता हूँ, जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर हमें आजादी दिलाई। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त 1947 का दिन हर भारतीय के लिए गर्व और उल्लास का दिन है। यह वह दिन है जब हमारे देश ने अंग्रेजी हुकूमत से स्वतंत्रता प्राप्त की। यह दिन हमें उन संघर्षों और बलिदानों की याद दिलाता है जो महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस और अन्य अनेकों स्वतंत्रता सेनानियों ने किए।
हनुमत संस्कृत स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य महंत डा महेश दास जी महाराज ने कहा कि आजादी... तीन शब्दों से मिलकर बना है। इसी आजादी को पाने के लिए भारत ने 200 साल तक अंग्रेजों से लड़ाई लड़ी। भारत की स्वतंत्रता की यात्रा अपार बलिदान, साहस और एकता से भरी हुई है। 1857 के विद्रोह से लेकर भारत छोड़ो आंदोलन तक, हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने हमारी स्वतंत्रता के लिए कई चुनौतियों का सामना किया।वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास ने कहा कि हमारे स्वतंत्रता संग्राम ने हमें न केवल एक स्वतंत्र राष्ट्र का उपहार दिया, बल्कि हमें एकता, विविधता, और सहिष्णुता की विरासत भी सौंपी। आज, हमें यह सोचना चाहिए कि हम किस प्रकार अपने देश को और भी अधिक सशक्त बना सकते हैं। हमें अपने पूर्वजों के सपनों को साकार करने की दिशा में काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज, हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम शिक्षा, स्वच्छता, और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देंगे। हम सभी को यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारे देश के हर नागरिक को समान अधिकार और अवसर प्राप्त हो। हम सभी को मिलकर एक ऐसे भारत का निर्माण करना है जहां गरीबी, अशिक्षा, और भेदभाव का कोई स्थान न हो।
रसिक पीठाधीश्वर महंत जन्मेजय शरण ने कहा कि आइए, हम सब मिलकर यह प्रतिज्ञा करें कि हम अपने देश की प्रगति में अपना योगदान देंगे और इसे दुनिया में एक महान राष्ट्र बनाएंगे। बड़ा भक्त माल पीठाधीश्वर महंत अववेश दास महाराज ने कहा कि मैं आप सभी को एक बार फिर से स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ। आइए, हम गर्व से कहें - "जय हिंद! जय भारत!" इस यात्रा में निर्वाणी अनि अखाड़ा के श्रीमहंत मुरली दास जी महाराज, रसिक पीठाधीश्वर महंत जन्मेजय शरण जी महाराज, बड़ा भक्त माल पीठाधीश्वर महंत अववेश दास जी महाराज, हनुमत संस्कृत स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य महंत डा महेश दास जी महाराज, निर्वाणी अनी के सचिव सत्यदेव दास जी महाराज, महंत हरिभजन दास जी श्रृंगार कुंज, महंत छविराम दास लम्बे हनुमान, महंत मनीष दास जी पत्थर मंदिर, महंत राजेश जी पहलवान, पुजारी रमेश दास जी, मुकेश दास जी, जयमंगल दास जी, मनीराम दास जी, देवेश दास जी, रिंकु दास जी, परमानंद दास जी, अभिषेक दास जी, विराट दास जी, रामानन्द दास जी, प्रेमूर्ति कृष्णकांत दास जी, महंत संजय दास के निजी सचिव शिवम श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में नागा साधु संत मौजूद रहें।
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